Prernadayak Hindi Story – लालच का अंत बुरा होता है

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Prernadayak Hindi Story – लालच का अंत बुरा होता है
नमस्कार दोस्तों, नवरात्रों का ये पावन त्यौहार आप सब को बहुत बहुत ज्यादा सुख और समृधि आपके जीवन में लेकर आये, अष्टमी के बाद आज राम नवमी का त्यौहार है,आप सब राम नवमी की भी हार्दिक शुभकामनाये, दोस्तों आज के इस ब्लॉग में हम बात करने वाले है इंसान के अन्दर एक वायरस की तरह पैदा हुए लालच के बारे में, हमारा लालच बहुत बुरा होता है ये तो सच बात है, लालच में इन्सान की आँखे बंद हो जाती है फिर बाद में पछताना पड़ता है, इसलिए आज आपके लिए Prernadayak Hindi Story – लालच का अंत बुरा होता है लेकर आई हूँ
तो दोस्तों  एक बार की बात है. एक दिन ऋषि अपनी आश्रम में बैठे थे. अचानक से उनको एक भयभीत आवाज सुनाई दी- बचाओं बचाओ, इसके बाद ये आवाज़ सुनकर ऋषि तुरंत अपने आश्रम से बाहर आए और देखा कि एक छोटा चूहा जख्मी हालत में दर्द के मारे कराह रहा है . ऋषि उन्होंने पूछा की आखिर ये सब क्या हुआ?
इसके बाद चूहे ने आपबीती सुनाते हुए कहा  कि एक कौवा मुझे अपनी चोंच में दबाकर ले जा रहा था. लेकिन जैसे ही उसने कांव-कांव बोला तो उसकी चोंच से मैं बाहर गिर गया. भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि मेंरी जान बच गई , ये सब सुनकर ऋषि को उस चूहे पर दया आ गयी  और उन्होंने सोचा कि क्यों न इसे बिल्ली बना दूं, ताकि इसको किसी’ पक्षी से भय नहीं रहेगा
ऋषि ने फौरन एक  मंत्र पढ़ा और उसी समय चूहे को बिल्ली बना दिया. अब चूहा अपने अन्दर ये अन्दर ये बड़ा बदलाव देखकर बहुत ज्यादा खुश हुआ, इसके बाद ऋषि कहते हैं कि जाओ, तुम्हें अब डरने की जरूरत नहीं है. अब चूहा जो बिल्ली बन चूका था वह अब ऋषि के साथ ही उनके आश्रम में रहने लगा,सब कुछ अब बढ़िया चल रहा था, बिल्ली बनकर अब चूहा बिना किसी डर के घुमता था, अब वो पूरी तरह से बेफिक्र था
लेकिन एक दिन आश्रम में एक कुत्ता आया और उस की नजर सीधी बिल्ली पर पड़ी, बस फिर क्या था उसी समय कुत्ता तुरंत बिल्ली पर झपटा, बिल्ली फिर से चिल्लाई .. गुरु जी बचाओ,  ऋषि उस समय स्नान करके आ रहे थे. उन्होंने देखा कि एक कुत्ता बिल्ली को परेशान कर रहा है, तो उन्होंने तुरंत मंत्र पढ़ा और बिल्ली को कुत्ता बना दिया. वो कुत्ता बनकर इतना खुश हो गया कि खुशी करे मारे और भी ज्यादा निडर हो गया की अब वो कुता बन गया है और अब बिल्ली ही नहीं रहा.  अब उसने सोचा मै पहले चूहे से बिल्ली बना फिर बिल्ली से कुत्ता बना, वाह  क्या तकदीर थी उसकी! धीरे-धीरे उसके मन में लालच भर गया.
इसी लालच की वजह से उसने सोचा कि क्यों न मैं शेर बन जाऊं, ताकि लोग मुझसे डरें, मुझे किसी से डर न रहे . वो ऋषि के पास गया और बोलो, हे गुरुजी! मुझे शेर बना दीजिए, लोग मुझे मारके भगा देते हैं . मैं किसी का कुछ नुकसान नहीं करूंगा . ऋषि ठहरे दयालु मंत्र पढ़ा और उसे कुत्ता से शेर बना दिया अब वह शेर बनकर अपने आप को बड़ा ही भाग्यशाली समझने लगा और लोगों को डराने लगा . एक दिन उसके मन में लालच आया कि क्यों ना मै इस ऋषि को ही मार दूं, ताकि कोई यह न जान पाए कि मैं पहले चूहा से बिल्ली बना, बिल्ली से कुत्ता बना, फिर कुत्ता से शेर बना.
इसके बाद वो सही मौके का इंतजार करने लगा. एक दिन उसने देखा कि ऋषि पूजा में ध्यान लगाए हुए हैं, तो उसने तुरंत ऋषि पर आक्रमण किया . ऋषि को सब पता चल गया कि ये चूहा ही है . उन्होंने तुरंत मंत्र पढ़ा और उसे पुन: पहले वाली अवस्था में ला दिया, जिससे वो फिर से चूहा बन गया. ऋषि ने चूहे को इस गंदी हरकत के लिए अपने घर से भगा दिया, जिससे चूहे की जान फिर से पहले की तरह खतरे में हो गई
इस कहानी से सीख – हमें लालच कभी भी नहीं करना चाहिए . लालच आदमी को अंधा बना देता है. जितना हमारे पास है, उतने में ही संतुष्ट रहना चाहिए .