Hindi Diwas 2020 के लिए ये ख़ास 5 सुझाव और स्पीच

Hindi Diwas 2020 के लिए ये ख़ास 5 सुझाव और स्पीच

Hindi Diwas 2020 के लिए ये ख़ास 5 सुझाव और स्पीच

 

Hindi Diwas Kab hai 

 

14 सितंबर  2020 को हिंदी दिवस है पर वह हिंदी दिवस हम कितना मना रहे हैं हिंदी कहने को हमारी राजभाषा है हमारी मातृभाषा है पर हम उसका कितना सम्मान कर रहे हैं कितना उसको अपनी जिंदगी में शामिल कर रहे हैं या सिर्फ 1 दिन के लिए हिंदी दिवस मना रहे हैं अंग्रेजी के खिलाफ अकेले हिंदी नहीं लड़ सकती राजभाषा का कहना पहनाकर सरकारी दफ्तरों में हिंदी की हैसियत मालिक जैसी नहीं दासी जैसी है

 

 

कैसे हिंदी को हम अपने संस्कारों की विरासत में शामिल करें यहां पर पांच सुझाव है

 

हिन्दी दिवस पर निबंध (Essay on Hindi Diwas)

 

1) भाषा के संस्कार हमेशा घर से ही मिलते हैं जिसमें घर के सभी सदस्यों का संपूर्ण योगदान होता है गर्भ में मिली भाषा को ही मातृभाषा कहा जाता है अर्थात बच्चा जिस मां के पेट से जन्म लेता है जिसकी गोद में उसका बचपन बीता है वह मां ही उसको मात्री भाषा का ज्ञान करा सकती है और बचपन में जो नीव पैदा कर दी जाती है वह ताउम्र कायम रहती है और व्यक्ति को हमेशा उसकी जड़ों से जोड़ कर रखती है फिर वह चाहे देश में बसे या विदेश में या फिर किसी भी भाषा में काम करें उसे अपनी भाषा का ज्ञान रहता है

 

 

इसलिए भाषा के लिहाज से स्त्री की भूमिका घर में बहुत महत्वपूर्ण होती है अब आप तमिल बंगाली कन्नड़ किसी भी भाषा के लोगों को देख लीजिए इनके बच्चों को अपनी भाषा का पूरा ज्ञान रहता है क्योंकि अपनी भाषा से ही हम उन्हें अपनी विरासत इतिहास पूर्वज रिवाज परंपरा संस्कृति धर्म सब कुछ दे सकते हैं और भाषा से ही हम बच्चे के हृदय तक पहुंच सकते हैं और अपनी भाषा से ही हम बच्चे से आसानी से बात कर सकते हैं

 

 

पढ़ना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे जीवन को दिशा मिलती है पर मातृभाषा से जो हमें एक ज्ञान मिलता है वह कोई भी नहीं दे सकता अंग्रेजों के गुलामी के काल में भी हिंदी का बोलबाला तब भी था पर इस को वाक्य में ही राजभाषा अगर बनानी है तो हमें हिंदी की बगिया को महकाना पड़ेगा

 

 

2) घर पर बोलने का नियम बनाना पड़ेगा कि पढ़ाई के समय को छोड़कर बाकी जब भी घर में बात की जाएगी वहां पर हिंदी का ही प्रयोग किया जाएगा हिंदी के शब्दों के माध्यम से ही अपनी अभिव्यक्ति की जाएगी इससे बच्चे का दिमाग हिंदी में भी समान रूप से चलेगा और हिंदी काम चलाओ ना होकर अच्छी हिंदी होगी और हिंदी कभी भी किसी की तरक्की में बाधा नहीं बन सकती

 

 

 

3) बच्चा आपसे घर में किसी भी भाषा में प्रश्न पूछे चाहे वह अंग्रेजी में पूछे पर आपको यह निर्धारित करना होगा कि बच्चे को अंग्रेजी में जवाब देने की बजाय आप उसे हिंदी भाषा में जवाब दें इस तरह से वह दोनों भाषाएं सीखेगा और हिंदी कोई बहुत मुश्किल भाषा नहीं है और उसे उसकी प्रथम भाषा के रूप में हिंदी में ही ज्ञान दें और उसको के अलावा वेबसाइट डिक्शनरी और तकनीक की सहायता लेना भी अगर आप जरूरी समझते हैं तो जरूर ले

 

 

 

4) जब भी अपनी संस्कृति सभ्यता और परंपरा के बारे में बच्चों को परिचित कराना हो तो अंग्रेजी भाषा की बजाय हिंदी भाषा में अपने बच्चों को उसका ज्ञान दें जैसे बरगद पीपल तुलसी पूजा प्रार्थना गुरु आशीर्वाद शुभकामना बधाई अभिनंदन जैसे शब्दों का प्रयोग करें ना कि अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करें बच्चों को हिंदी भाषा से जुड़ना है तो हमें उसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी और हमारे वेद पुराण सब कुछ हिंदी और संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं अगर हम अपने बच्चों को हिंदी भाषा से अवगत नहीं कराएंगे तो इन सब से हमारे बच्चे अछूते रह जाएंगे जबकि अमेरिका जैसे देशों के लोग आकर हमारे वेदों का अध्ययन कर रहे हैं

 

 

5) जिस तरह से घर की स्त्री घर के लिए बचत बनाती है और सभी जरूरतों का ध्यान रखती है उसी तरह से घर के बजट में हिंदी के समाचार पत्र पत्रिकाओं पर भी खर्च के लिए धनराशि निर्धारित करनी चाहिए और घर में हिंदी का शब्दकोष भी जरूर रखें यह खर्च नहीं कि आपका निवेश है जो आपके बच्चों को भाषा के साथ-साथ अच्छे संस्कार भी देगा क्योंकि अभिभावकों के पास आज के दौर में कम समय है

 

 

अगर अंग्रेजों के वर्चस्व को तोड़ना है तो भारत की भाषाओं को किसी एक दिवस की जरूरत नहीं रहे तो ही हिंदी अंग्रेजी के वर्चस्व के खिलाफ लड़ाई लग सकती है और हिंदी के साथ बाकी भाषाओं को भी जोड़ा जाना चाहिए

 

Hindi Diwas 2020 के लिए ये ख़ास 5 सुझाव और स्पीच

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