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Nirjala Ekadashi – निर्जला एकादशी की व्रत कथा और शुभ मुहूर्त

Nirjala Ekadashi - निर्जला एकादशी की व्रत कथा और शुभ मुहूर्त
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Nirjala Ekadashi – निर्जला एकादशी की व्रत कथा और शुभ मुहूर्त

नमस्ते दोस्तों, आप सब का स्वागत है, आज हम सब के लिए एक अच्छी बात है की अभी हम स्वस्थ है, और आप सब के लिए भी यही मनोकामना है की आप हमेशा स्वस्थ रहे, आज बात कर रहे है निर्जला एकादशी की, जानेगे की निर्जला एकादशी कब है और जानेगे की निर्जला एकादशी की व्रत कथा के बार में

निर्जला एकादशी डेट एंड टाइम 

बात करे हिन्दू पंचाग की तो हर साल निर्जला एकादशी का व्रत जयेष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है, बात करे इस बार निर्जला एकादशी 2022 के समय और तारीख की तो 10 जून 2022  को सुबह 7 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी की 11 जून 2022 की सुबह 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगी 

निर्जला एकादशी कथा 

निर्जला एकादशी की कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत के संदर्भ में निर्जला एकादशी की कथा मिलती जो इस प्रकार है। हुआ यूं कि सभी पांडवों को धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष प्राप्ति के लिए महर्षि वेदव्यास ने एकादशी व्रत का संकल्प करवाया। अब माता कुंती और द्रोपदी सहित सभी एकादशी का व्रत रखते लेकिन भीम जो कि गदा चलाने और खाना खाने के मामले में काफी प्रसिद्ध थे

कहने का मतलब है कि भीम बहुत ही विशालकाय और ताकतवर तो थे लेकिन उन्हें भूख बहुत लगती थी। उनकी भूख बर्दाश्त के बाहर होती थी इसलिये उनके लिये महीने में दो दिन उपवास करना बहुत कठिन था। जब पूरे परिवार का उन पर व्रत के लिए दबाव पड़ने लगा तो वे इसकी युक्ति ढूंढने लगे कि उन्हें भूखा भी न रहने पड़े और उपवास का पुण्य भी मिल जाए।

अपने उदर पर आयी इस विपत्ति का समाधान भी उन्होंने महर्षि वेदव्यास से ही जाना। भीम पूछने लगे हे पितामह मेरे परिवार के सभी सदस्य एकादशी का उपवास रखते हैं और मुझ पर भी दबाव बनाते हैं लेकिन मैं धर्म-कर्म,पूजा-पाठ,दानादि कर सकता हूं लेकिन उपवास रखना मेरे सामर्थ्य की बात नहीं हैं। मेरे पेट के अंदर वृक नामक जठराग्नि है जिसे शांत करने के लिये मुझे अत्यधिक भोजन की आवश्यकता होती है

 

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