Motivational Story Hindi कर्म की गति

Motivational Story Hindi कर्म की गति

Motivational Story Hindi कर्म की गति

 

आजकल लोगों को यह बहुत बड़ा भ्रम होना शुरू हो गया कि मेरा कोई क्या कर लेगा अगर किसी के साथ बुरा कर भी लिया तो क्या होगा कुछ नहीं होगा पर उस परमेश्वर के दरबार में सब का लेखा जोखा चलता रहता है और सबको अपने अपने कर्मों का भुगतान करना पड़ता है जब कोई दुख तकलीफ आती है तब हम भगवान को कहते हैं और पूछते हैं कि ऐसे हमारे कौन से कर्म थे कि हमें यह दुख देखना पड़ रहा है या भोगना पड़ रहा है बस हम लोगों के पास हमारे पुराने कर्मों का लेखा जोखा नहीं होता इसलिए हम दुखी होकर रह जाते हैं इसको मैं एक कहानी के माध्यम से आप को समझाने की कोशिश करूंगी

 

यह कहानी एक महिला की है वह बहुत ही धर्म कर्म में ध्यान रखती है हर समय प्रभु का नाम लेना सत्संग में जाना गुरु के आश्रम में जाना बहुत सेवा करने किसी को गलत नहीं बोलती थी सब से प्रेम के साथ रहती थी

 

 

बस उसकी जिंदगी में सिर्फ एक ही दुख था कि उसका पति रोज उससे झगड़ा था था रोज उसके साथ मारपीट करता था किसी ना किसी बात पर रोज झगड़ा करता था एक दिन मुझे अपने गुरु महाराज के पास जाती थी उससे उसने प्रश्न किया हे गुरुदेव मेरे ऐसे कौन से पाप कर्म है कि मेरा पति मुझे रोज मारता है मुझसे रोज झगड़ा करता है मैं जैसे जैसे आप मुझे भजन सिमरन बताते हैं मैं वैसा करती हूं सेवा भी करती हूं पर मुझे इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल रहा

 

 गुरुजी से पूछते हैं कि क्या वह तुझे घर में कमा कर पैसे ला कर देता है तेरे खाने पीने पर तो कोई बंदिश नहीं लगाता तो उस औरत ने कहा जी हां वह कमाकर सारे पैसे मुझे लाकर देता है मेरे खाने पीने पर भी कोई दिक्कत नहीं करता पर पता नहीं क्यों छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आ जाता है उसको और हाथ उठा देता है तो गुरु जी ने कहा फिर बिल्कुल ठीक है अगर वह तुझे कमाकर सारी कमाई तुझे दे रहा है और रोटी भी दे रहा है तो उस महिला ने सोचा अब मैंने गुरु महाराज को अपनी समस्या बता दी है तो शायद मेरा इस समस्या से छुटकारा हो जाए

 

कुछ समय बाद फिर महिला अपने गुरु जी के पास जाती है और अपना दुखड़ा रोती है और कहती है कि महाराज मैंने आपके पास अपनी प्रार्थना भी करी थी और अभी भी मेरे पति में कोई सुधार नहीं हुआ मेरा ऐसा क्या कसूर है मैं इस जन्म में तो सेवा भी करती हूं सिमरन भी कर रही हूं गरीब लोगों की भी सेवा कर रही हूं भूखे को रोटी भी दे रही हूं पर मुझे जो पति सुख मिलना चाहिए वह मुझे क्यों नहीं मिल रहा मेरे घर में होने वाली आमदनी भी ठीक-ठाक है तो गुरु महाराज जी ने फिर उससे वही प्रश्न किया कि क्या तुझे वह कमाकर कमाई तेरे हाथ में दे रहा है और तेरे खाने पीने पर तो कोई बंदिश नहीं रख रहा तो उस महिला ने फिर वही जवाब दिया नहीं ऐसा मेरे साथ कुछ नहीं हो रहा बस मुझे उसके झगड़ा करने से और मारपीट करने से दिक्कत है

 

गुरुजी ने कहा सुनना चाहती है तो सुनते और हिम्मत रख कि जिस पति के साथ तू रह रही है यह पति तेरा पिछले जन्म में सोतेला बेटा था तो रोज सुबह शाम उसे मार दी थी और कई कई दिन तक उस बेचारे को खाना नहीं देती थी उसे भूखा सोना पड़ता था आसपास के लोग आकर उसको खाना देते थे उसको तेरी मार से बचाते थे इसलिए मैं तुझ से बार-बार यह पूछा था कि तुझे वह रोटी दे रहा है तुम महिला को महाराज जी ने कहा कि तूने जो कर्म की है उसका भुगतान तो तुझे देना ही पड़ेगा इसलिए कभी भी कर्म करते हुए यह मत सोचो कि हमें कोई नहीं देख रहा 

 

वह ऊपर वाला सर्वशक्तिमान है जिसके पास हमारे सभी कर्मों का लेखा जोखा है जिसका हिसाब किताब हमें आज नहीं तो कल किसी ना किसी रूप में चुकाना पड़ेगा इसलिए अपने कर्म करते हुए यह जरूर ध्यान रखें की कर्मों का भुगतान हमें खुद ही करना है कोई और हमारी जगह कर कर्मों का भुगतान नहीं करेगा

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