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Motivational story जिंदगी में छोटा सा सहयोग भी महत्वपूर्ण

Motivational story जिंदगी में छोटा सा सहयोग भी महत्वपूर्ण
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Motivational story जिंदगी में छोटा सा सहयोग भी महत्वपूर्ण

 

जिंदगी में हर व्यक्ति को किसी ना किसी की सहायता की जरूरत पड़ती है और कहा जाता है जमीन पर पड़े मिट्टी के कण की भी कई बार जरूरत पड़ जाती है और वह भी आपका जिंदगी में सहयोग कर सकता है पर कई बार हम उन चीजों को मानते नहीं हैं समझते नहीं हैं और किसी के छोटे से सहयोग को नजरअंदाज कर सकते हैं क्या आपने कभी देखा है कि एक सुई जो सिलने का काम कर सकती हैं वहीं कैंची बड़ी होकर भी काटने का काम करती है तो हर एक का अपनी जिंदगी में अलग अलग महत्व है अलग अलग काम है तो किसी के छोटे से सहयोग को नकारना नहीं चाहिए

 

 

 

आप कभी किसी ऑफिस में अगर काम कराने गए होंगे तो आपने देखा होगा कि अगर आप उस ऑफिस के चपरासी को खुश कर देते हैं तो आपका काम उतनी जल्दी से हो जाता है और वह ऑफिसर के बारे में भी आपको जानकारी लाकर दे देते हैं और कई लोग चपरासी को नजरअंदाज करके सीधा ऊपर तक पहुंचते हैं तो उनको उनकी फाइल का स्टेटस नहीं पता लगता कि बात में यहां इसलिए लिख रही हूं कि किसी का भी सहयोग जिंदगी में कभी गलत नहीं होता किसी के छोटे सहयोग को कम नहीं आंकना चाहिए कौन कब किस घड़ी आपके पास आकर आपको सहयोग दे दे आपको पता भी नहीं पड़ेगा
Motivational story जिंदगी में छोटा सा सहयोग भी महत्वपूर्ण, आपको कैसा लगा, अपना फीडबैक जरुर दे 
भगवान राम की जिंदगी में जुड़ी एक गिलहरी की कहानी से आपको छोटे सहयोग की बड़ी महत्ता के बारे में बताने जा रही हूं
एक समय की बात है जो भगवान राम लंका पर पहुंचने के लिए समुद्र पर पुल बनाने की तैयारी कर रहे थे भगवान राम की सेना में नल और नील नाम के दो वानर थे वह जो भी पत्थर पानी में डालते वह डूबते नहीं थे और इसी वजह से सारी वानर सेना ने उठा उठा कर पत्थर उनको दिए और वह पानी में फेंकते गए और उनका पुल बनता चला गया क्योंकि वह सतह पर उन पत्थरों को जमाते चले जाते थे और पुल बनता चला गया 
रामसेतु जब बन रहा था तो एक छोटी सी गिलहरी भी इस सारे प्रकरण को देख रही थी तो उसके मन में आया कि भगवान को कहीं ना कहीं सहायता की जरूरत है तो मुझे भी इस काम में अपना हाथ बटाना चाहिए तो उस नन्ही  गिलहरी से और तो कुछ नहीं हो सकता था उसने क्या करा समुंदर के पानी में अपनी पूछ धोती और वापस तट पर आकर अपनी पूंछ जो है रेत पर फेंक दी जो रेत  के कण उसकी पूंछ से चिपक ते उनको जाकर वह पत्थरों पर पटक आती  और वह दिन भर इसी तरह के काम में लगी रही और अपने आपको उसने थका लिया
अपनी तरफ से वह सहयोग कर रही थी कि उन पत्थरों को जमाने में जो पुल को जोड़ रखेंगे और समुद्र में से पानी की मात्रा कम होगी तो पुल आसानी से बन जाएगा कई वानरों ने उसका मजाक उड़ाया और वो बिना किसी मुश्किल के उस सुबह से लेकर शाम तक अपने काम को करती रही
भगवान राम सारा कुछ देख रहे थे शाम होते ही उन्होंने गिलहरी को अपनी गोद में उठाया और उसकी पीठ पर शाबाशी दी और धन्यवाद भी दिया कहा जाता है कि गिलहरी  के पीठ पर जो निशान है वह रामजी की उंगलियों के निशान हैं 
अगर नन्ही सी गिलहरी भगवान श्रीराम का स्नेह अपने छोटे से सहयोग से कर सकती है तो हम क्यों नहीं इसलिए जहां पर भी किसी को जरूरत हो तो सहयोग दीजिए यह मत सोचिए कि सहयोग छोटा है बड़ा है जिस रूप में जितना कर सके जरूर करिए आपका छोटा सा सहयोग केवल दूसरों के लिए नहीं बल्कि औरों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होता है