Importance of Moral Values in your life

Importance of Moral Values in our life

Importance of Moral Values in our life

 

आज मनुष्य की जिंदगी में से लगातार Moral Values की गिरावट हो रही है उसका कारण है कि अब हर मनुष्य अपनी सुख-सुविधाओं को पाने के लिए अपने आप को सुपर पावर घोषित करने की होड़ में कुछ भी करने को तैयार है जब कर्म ही इस तरह के हो जाएंगे तो नैतिकता का पतन तो अपने आप होना शुरू हो जाएगा पर मनुष्य इस बात को नहीं समझ रहा कीजिए कुछ समय के लिए हमें लाभ जरूर दे देंगे पर दूरगामी परिणाम इनके हमेशा विनाश वाले ही होंगे नैतिक मूल्य सदाचार सहनशील सत्य बोलना संस्कारी होना सभ्य होना चरित्रवान होना बड़ों की आज्ञा का पालन करना अपनी जिम्मेदारियों का एहसास होना यह सब नैतिक मूल्यों में आते हैं पहले मोरल वैल्यू उसकी अलग से कक्षाएं लगती थी पूरा पेपर होता था आज Moral Values के नाम पर सिर्फ कक्षा में नंबर दे दिए जाते हैं तो जो हमारी युवा पीढ़ी है उसको नैतिक मूल्यों का पता ही नहीं है

 


किसी भी देश समाज परिवार की प्रगति बिना Moral Values के नहीं हो सकती नैतिक मूल्य जितने सुदृढ़ होंगे परिणाम उतना ही लाभकारी होगा और नैतिक मूल्य जितने नीचे गिरते चले जाएंगे वह पूरी मानव जाति के लिए घातक होते चले जाएंगे क्योंकि जब इंसान अपने निजी स्वार्थ के लिए सामने वाले का विनाश किसी भी कीमत पर करने को तैयार हो जाता है चाहे उसमें कोई व्यक्ति हो चाहे उसमें अपना प्रदेश हो या कोई अपना परिवार हो

नैतिक गुणों को विकसित करने के लिए माता पिता को बचपन से ही जागृत अपने बच्चों को करना चाहिए अच्छी आदतों का अनुसरण करना सिखाना चाहिए हो सकता है उसके लिए माता-पिता को कुछ कठोर भी होना पड़े पर वह बहुत जरूरी है नैतिकता का अनुसरण सबके लिए बड़ा जरूरी है चाहे वह कोई विद्यार्थी है कोई अफसर है कोई व्यापारी है कोई राजनेता है कोई सिपाही है कोई ना नौकर है कोई धार्मिक गुरु है वह किसी भी जगह पर बैठा है सबके लिए नैतिक मूल्यों का पालन करना बड़ा जरूरी है

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और सामाजिक प्राणी होने के नाते नैतिक गुणों में सबसे बड़ा गुण है कि मनुष्य को अपने कर्तव्यों का बोध होना चाहिए उनका पालन उसे ईमानदारी से करना चाहिए चाहे वह घर परिवार के प्रति हो अपने नौकरी के प्रति जो अपने व्यापार के प्रति हो या उससे कोई धार्मिक कर्तव्य हो उसको वह सभी पूरे करने होंगे जिम्मेवारी से भाग के मनुष्य अपने कर्तव्य नहीं निभा सकता या अपने कर्तव्य किसी और को नहीं दे सकता

सबसे बड़ा गुण ज्ञान सीखने का होना चाहिए ज्ञान सीख कर उस पर अमल भी करना है हम बहुत सारे संगत में जाते हैं वहां से प्रवचन सुनकर आ जाते हैं फिर कहते हैं हमारी जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया क्योंकि हमने उन पर वचनों को अपनी जिंदगी में अमल नहीं किया इसी तरह से नैतिक मूल्य हैं जब तक हम उन्हें अपनी जिंदगी में वास्तविक रूप में नहीं उतारेंगे तब तक वह मूल्य हमारी जिंदगी में नहीं उतरेंगे

Moral Values कब और किन परिस्थितियों में खत्म होते हैं
जब मनुष्य अपनी आंतरिक ऊर्जा का सही प्रयोग नहीं करता और परिवार के मोह में पढ़कर अनुचित कार्य करता है अनीति पूर्व मार्ग पर चलता है जैसे कि आतंकवादी करते हैं जीवन को दिखावे की प्रवृत्ति में लेकर चलता है और अनुचित तरीकों से धन कमाता है अपने सुविधाओं के चलते मनुष्य प्रकृति से खिलवाड़ करना शुरू कर देता है जैसे अभी पेड़ काटकर कंक्रीट के जंगल बनते चले जा रहे हैं तो प्राकृतिक आपदाएं आ रही है उसका नुकसान मानवीय जाति को उठाना पड़ रहा है तो यह भी नैतिक गुणों के खत्म होने की वजह से यह क्योंकि किसी जो भी कंक्रीट के जंगल खड़े कर रहे हैं उन्होंने अपना फायदा सोचा उन्होंने प्रकृति के बारे में नहीं सोचा

किसी धर्म विशेष के प्रति कट्टरता पैदा कर ली और उस धर्म विशेष में व्यक्तियों को जोड़ने के लिए अनैतिक कार्य करने शुरू कर दिए और समाज के लोगों को डराना शुरू कर दिया आचरण अनैतिक करना शुरू कर दिया जैसे दुर्योधन था उसे सही गलत का ज्ञान तो था पर उसने जिद के कारण सिर्फ द्रौपदी को भरी सभा में चीरहरण के लिए बुला लिया और फिर महाभारत का युद्ध हुआ

सही और गलत को समझते हुए भी ना समझ पाना और कुरीतियों और परंपराओं के नाम पर गलत कार्य खुद भी करने लोगों से भी करवाने तो यह सब भी नैतिक मूल्यों का पतन ही है

Moral Values for Students
अगर हम बातें ही समाज को एक सही दिशा में लेकर जाना चाहते हैं तो अपने घर और परिवार में बड़े बुजुर्गों की यह जिम्मेवारी बन जाती है कि अपने बच्चों को नैतिक मूल्यों की जरूर जानकारी दें सरकारों को चाहिए कि वह स्कूलों में Moral Values Tips  पर पूरी तरह से ध्यान दें पूरे सब्जेक्ट की तरह इसको बनाया जाए और इसको प्रैक्टिकली इंप्लीमेंट भी कराया जाए क्योंकि जब तक हमारे बच्चों के मन में मानवीय संवेदनाएं जागृत बचपन से नहीं की जाएंगी तो वह बड़े होकर उन सब चीजों को नहीं सीख पाएंगे और अगर नैतिक मूल्यों का पतन हमारी युवा पीढ़ी में होता चला गया तो हम समाज और देश को नहीं संभाल पाएंगे