Corona काल में मानसिक तनाव से बचने के ये 5 टिप्स

Corona काल में मानसिक तनाव से बचने के ये 5 टिप्स
कोरोना महामारी के इस संकट काल में सब के ऊपर Stress बहुत हावी हो रहा है लोग तनावग्रस्त होते चले जा रहे हैं और कोविड-19 का असर शरीर से कहीं ज्यादा मन पर हो रहा है लोगों के मन में डर बैठता चला जा रहा है जिसकी वजह से कोरोना फोबिया जन्म लेता जा रहा है उन लोगों के लिए कोरोना  ज्यादा खतरनाक है जो पहले से ही मानसिक अवसाद के शिकार रहे हैं क्योंकि जैसे कोरोना के काल में लोगों को एक दूसरे से मिलने के लिए मना किया गया सामाजिक दूरी का और शारीरिक दूरी का पालन करने के लिए कहा गया तो कभी-कभी मानसिक अवसाद से जो पीड़ित व्यक्ति है वह भीड़ भाड़ वाली जगह से बहुत ज्यादा डर ना शुरू हो जाता है और जब हम किसी चीज से डरना शुरू करते हैं तो हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर उसका प्रभाव पड़ता है कोरोना महामारी का असर इतनी जल्दी खत्म नहीं होने वाला तो अपने मन के स्वास्थ्य को भी तैयार रखें
Corona काल में मानसिक तनाव से बचने के ये 5 टिप्स
Corona काल में मानसिक तनाव से बचने के ये 5 टिप्स
यह पांच टिप्स देने जा रही हूं कि आपका यह कोरोना का जो डर है वह किसी मानसिक अवसाद में ना बदले
1)  खुद को कभी अकेला ना छोड़े
इस महामारी के क्षणों में हम जितना ज्यादा सोचेंगे उतना ही हमारे मन को खतरा बढ़ता चला जाएगा इसलिए इसलिए जब भी कभी अकेलापन महसूस करें अपने आसपास घर परिवार के लोगों से जरूर बात करें उनसे अपने मन की फीलिंग उसको जरूर शेयर करें अपने आसपास कुछ अच्छे दोस्त रखें जिनके साथ आप हाथ मुस्कुरा सके

2)  आशा जीवित रखे क्योंकि जीवन कभी रुकता नहीं है
अपने मन के अंदर आशा की किरण जगाई रखिए क्योंकि जब हम किसी भी समस्या को खत्म करना चाहते हैं तो उसके लिए नजरिया भी बदलना पड़ेगा और जब हम नए नजरिए से किसी समस्या को हल करने का सोचेंगे तो नई ताकत भी मिलेगी नई ऊर्जा भी मिलेगी और छोटी-छोटी मन की तकलीफों के लिए डॉक्टर के पास नहीं अपने खुद से सुलझाइए और मेरा सबसे जो मन की अवस्था को सुलझाने का मंत्र है कि 10 मिनट अपने साथ बैठिए और अपनी आती जाती सांसों पर ध्यान केंद्रित कीजिए

3)  हालात बदलने संभव ना हो तो उसे स्वीकार कर लीजिए
कई बार जिंदगी में परिस्थितियां ऐसी आ जाते हैं कि हम उन हालातों को चाह कर भी नहीं बदल सकते अगर हम उन हालातों को नहीं बदल सकते तो उसे सभी कार लेने में ही भलाई है कहा जाता है कि अगर हम ऊपर वाले की रजा में रहेंगे तो हमारी मुश्किलें भी आसान हो जाएंगी और कभी-कभी आप अपने अतीत को याद करें जब आपने किसी मुश्किल को हराया होगा किसी मुसीबत को झेलना होगा उस समय भी तो आपने अपने अंदर उर्जा जगाई होगी और कैसे उन हालातों से निकले होंगे अपने अतीत की के जिन हालातों का संघर्षपूर्ण अपने सामना किया था उनको हमेशा ध्यान में रखें और अपने को ऊर्जा देते रहे

4) अपने अंदर उठती व्याकुलता को कम करें
जब हमारा मन कामकाज के बीच में लगता नहीं है सोचता नहीं है कुछ समझ नहीं आता क्या करें इसके बारे में मनोवैज्ञानिक ने बड़ा पहले कहा था कि इंसान जो है वह हमेशा कुंठा में गिरा रहता है वह आजादी भी जाता है और सुरक्षा भी जाता है पर आजादी और सुरक्षा दोनों के साथ समझौता करना पड़ता है दोनों चीजें कभी साथ में नहीं मिलती जब हम नौकरी करते हैं तो सुरक्षा का एहसास होता है और जब हम घर रहते हैं तो आजादी मिलती है पर आजकल महामारी की वजह से हम दोनों चीजें घर से कर रहे थे तो कहीं ना कहीं हमें यह लग रहा था कि हमारी सुरक्षा जो है कहीं खत्म होने वाली है तो जो चीजें हमारे पास वर्तमान में हैं उसी से आने वाले भविष्य को तैयार कीजिए और अपने अंदर उठती व्याकुलता को कम कीजिए

5) जिंदगी की अनसुलझी पहेली को खुद सुलझाइए
कई बार चलते चलते नहीं समझ में आता जिंदगी किस मोड़ पर कहां लाकर खड़ी कर दे, कभी इधर से संभालते हैं तो उधर से बिखर जाती है उधर से संभालते हैं तो इधर से बिखर जाती है और हमारी जिंदगी की अनसुलझी पहेली को हम ही सुलझा सकते हैं क्योंकि हमारे से अच्छा कोई और नहीं हमें जानता हमें अपने विचारों की दलदल से निकलना होगा उस सफर में आगे बढ़ना होगा अच्छे दोस्त और मार्गदर्शक जोड़ने होंगे क्योंकि जिंदगी तो हर समय हर पल परीक्षा आपकी लेगी इसलिए अपने ऊपर भरोसा रखिए

मानसिक अवसाद की स्थिति में जो व्यक्ति डर से प्रभावित हो उसको सही जानकारी दें उसके साथ पॉजिटिव बातें करते रहे धीरे-धीरे उसे घर से निकालिए क्योंकि कोरोना की बीमारी कुछ ही हफ्तों में जाने वाली नहीं है अगर हम अपनी बहुत अधिक सावधानी रख रहे हैं तो भी हमारे अंदर कोरोना फोबिया पैदा हो चुका है उसके ऊपर भी ध्यान दें हमें उस समय डॉक्टरी सलाह की जरूरत है क्योंकि जैसे-जैसे यह फोबिया हमारे अंदर बैठता है हमारा ब्लड प्रेशर या तो कम होता है यह बढ़ता चला जाता है घबराहट होनी शुरू हो जाती है भावनात्मक रूप से हम कमजोर हो जाते हैं चिंता बढ़ती है गुस्सा करते हैं बार-बार उदासी महसूस होती है और घर में भी झगड़े होने शुरू हो जाते हैं तो इन सब चीजों से बचने के लिए जो ऊपर के टिप्स दिए गए हैं उनको पालन करिए अगर घर में कोई ऐसा व्यक्ति है तो उसकी सहायता करिए उसको उसकी तरफ  आप की जिम्मेवारी बढ़ती है उसकी तरफ लापरवाही मत बरतें
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