Best Poem About Life ये सच है बदल गयी हूँ मै

Best Poem About Life ये सच है बदल गयी हूँ मै

Best Poem About Life ये सच है बदल गयी हूँ मै

नमस्कार, आप सब का स्वागत है एक बार फिर से, उम्मीद करती हूँ इस ठण्ड के मौसम में आप अपनी फैमिली का और खुद का ख्याल रख रहे होंगे, आज के इस ब्लॉग में बात करने वाली हूँ life cycle of a woman, महिलाओं की लाइफ के बारे में, कितना बदलाव आता है महिला के जीवन में, कैसे वो खुद को ढाल लेती है जीवन के हर पड़ाव में

इस कविता में बात करेंगे Stages of a woman life के बारे में, कुछ इमोशनल पल जो हर एक महिला के जीवन में आते है लेकिन फिर भी वो स्ट्रोंग बनकर सबसे आगे रहती है, परिवार हो या काम, सबका बराबरी से ख्याल रखना ये महिला से बेहतर कोई नहीं कर सकता, तो चलिए नीचे इस कविता को पढ़कर आप भी अपनी राय जरुर दे, आपका फीडबैक काफी प्रोत्साहन देता है, फिर वो चाहे अच्छा वाला हो या बुरा वाला, दोनों ही मोटीवेट करते है हमें 

Poems about being a woman

यह सच है बदल गयी हूँ मैं …

उम्र आने पर संवर गयी हूँ मैं …

हाँ यह सच है ,

कुछ-एक सफ़ेद बालों की गरिमा से भर गयी हूँ…

एक औरत से माँ बन गयी हूँ मैं !…

inspirational poems for women 

सबको प्यार से संभाला अब तक,

अपनी जरूरतों को प्यार से सहलाया आज ,

हाँ ,थोड़ी -थोड़ी सी बदल गयी हूँ मैं !

 

रिश्तों को निभाती हूँ ,

उससे जुड़े भार नहीं ढोती ,

कितने बोझ अपने कन्धों पर लेकर चलूँ ,

समझ में आ गयी है यह बात कि ,

आखिर औरत हूँ,धरती नहीं हूँ मैं !

Poem for a strong woman

आजकल दूसरों को एकदम से सलाह नहीं देती ,

अगर उसकी स्थिति मेरे समझ से बाहर हो

अपने ज्ञान का प्रर्दशन करने से पहले,

दूसरों को सलाह देने से पहले, खुद को टटोलने लगी हूँ मैं !

 

उनको इज़्ज़त देती हूँ,

उनका पक्ष जानने की कोशिश करतीं हूँ,

सासु माँ को सास रहने देतीं हूँ ,

माँ समझकर अपनी अपेक्षाएं नहीं बढाती अब,

लगता है खुश रहने लगीं हूँ मैं !

 

उनके घर में गया मेरा 5 -10 रुपया शायद घर की जरुरत के दिए के लिए तेल बन जाये

इसलिए आजकल सब्जी वाले ,

ऑटो वाले से ,

काम वाली से बिन बात मोलभाव नहीं करती ,

शॉपिंग मॉल में लुटे पैसे का भाव समझ गयी हूँ मैं |

 

जानती हूँ खुद को सजाना,संवारना जरुरी है पर खुद को सँवारने से पहले आत्मा पर पड़े मैल खुरचने लगीं हूँ मैं !

लगता है अब निखर गयीं हूँ मैं !

 

थक जाने पर शरारतें बच्चों की  परेशां करतीं है ,

पर अब उनपर चिल्लाती नहीं ,

उन्हें समझने की कोशिश में लगीं हूँ मैं

गीली मिट्टी सवांरने लगीं हूँ मैं !

 

बुजुर्गों के किस्सों मे उनके बचपन को जी लिया करतीं हूँ ,

अनेकों बार सुनी उनकी बातों पर आज उन्हें टोकती नहीं बस पहली बार सुना हो वैसे मज़े लेने लगीं हूँ मैं |

 

हर एक दिन को आखरी समझ कर जीने का तरीका सीख रहीं हूँ 

अपने इस नए “मैं” से प्यार करने लगीं हूँ मैं 

 

वक़्त से पंख उधार लेकर तितलियों सी उड़ने लगी हूँ मैं, फिर भी पैरों के नीचे जमीन रखतीं हूँ ,

 खुद से दोस्ती करने लगी हूँ मैं

Best Poem About Life ये सच है बदल गयी हूँ मै

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