त्योहारों के सीज़न में सेहत का ध्यान कैसे रखें

त्योहार खुशियाँ लाते हैं, लेकिन अक्सर अपने पीछे अपच, वज़न बढ़ने, बेहाल नींद और थकान भी छोड़ जाते हैं। अच्छी बात यह है कि थोड़ी-सी समझदारी से आप हर पकवान का स्वाद भी ले सकते हैं और सेहत भी बचाकर रख सकते हैं।

दशहरा, धनतेरस, दिवाली, भाई दूज, छठ से लेकर शादियों के सीज़न तक, अक्टूबर से दिसंबर के बीच हमारे घरों में लगातार दावतें, मेल-मिलाप और देर रात तक जागना चलता रहता है। इन हफ़्तों में तीन चीज़ें एक साथ बिगड़ती हैं: खान-पान (मिठाई, तला-भुना और बाहर का खाना), दिनचर्या (नींद, व्यायाम और खाने का समय) और हवा (पटाखों का धुआँ और बढ़ता प्रदूषण)।

इसी वजह से हर साल इन दिनों में एसिडिटी, पेट की गड़बड़ी, ब्लड शुगर और बीपी का उतार-चढ़ाव, सांस की तकलीफ़ और जलने की घटनाएँ बढ़ जाती हैं। यह ब्लॉग आपको त्योहारों में खुश रहने के साथ-साथ स्वस्थ रहने के आसान और व्यावहारिक तरीके बताता है।

1. खान-पान: स्वाद भी, संतुलन भी

त्योहारों में सबसे बड़ी चुनौती खाने की मात्रा और खाने का समय होता है। पूरी पाबंदी लगाने के बजाय “समझदारी से खाने” का तरीका अपनाइए।

घर से हल्का खाकर निकलें। दावत में भूखे पेट जाने पर हम ज़रूरत से ज़्यादा खा लेते हैं। निकलने से पहले एक फल, मुट्ठी भर भुने चने या एक कटोरी सलाद खा लें।

मिठाई की मात्रा तय रखें। एक बार में एक या दो छोटे टुकड़े काफ़ी हैं। मिठाई को खाने के बीच में नहीं, बल्कि भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में लें। रोज़ मिठाई खाने के बजाय त्योहार के मुख्य दिन उसका आनंद लें।

थाली को संतुलित रखें।

  • आधी थाली सब्ज़ी और सलाद से भरें
  • एक चौथाई हिस्से में दाल, पनीर, दही या अंडा जैसा प्रोटीन रखें
  • बाकी एक चौथाई में रोटी या चावल रखें
  • तली हुई चीज़ें और मिठाई अलग से, छोटी मात्रा में लें

तले हुए पकवानों पर नियंत्रण। समोसे, कचौड़ी, पकौड़े और नमकीन एक साथ न खाएँ। घर पर बनाते समय तेल को बार-बार गर्म करके दोबारा इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे पेट और दिल दोनों पर बुरा असर पड़ता है। जहाँ हो सके, एयर फ्रायर या ओवन में बेक करके बनाएँ।

धीरे और ध्यान से खाएँ। पेट भरने का संकेत दिमाग तक पहुँचने में लगभग 20 मिनट लगते हैं। इसलिए धीरे खाएँ, अच्छी तरह चबाएँ और जब पेट लगभग भर जाए तो रुक जाएँ।

स्वस्थ मिठाई के विकल्प।

  • खजूर, अंजीर, मेवे और गुड़ से बने लड्डू (सीमित मात्रा में)
  • बिना चीनी या कम चीनी वाली खीर, फलों का रायता
  • बेक की हुई मिठाइयाँ, घर के बने सूखे मेवों के पैकेट
  • उपहार में मिठाई की जगह सूखे मेवे या फल देना

खाने के बाद थोड़ा चलें। भारी भोजन के बाद 10 से 15 मिनट की सैर पाचन में मदद करती है और ब्लड शुगर को बढ़ने से रोकती है।

2. व्रत और उपवास में सावधानियाँ

नवरात्रि, करवा चौथ, छठ और धनतेरस जैसे अवसरों पर बहुत से लोग उपवास रखते हैं। उपवास सही तरीके से रखा जाए तो शरीर को आराम मिलता है, लेकिन गलत तरीके से रखने पर कमज़ोरी, चक्कर और एसिडिटी हो सकती है।

  • व्रत खोलते समय हल्का खाएँ। सीधे तला-भुना या भारी भोजन करने के बजाय पानी, नारियल पानी, फल या दही से शुरुआत करें।
  • व्रत के दौरान पानी न छोड़ें। अगर निर्जला व्रत नहीं है तो पानी, छाछ, नींबू पानी और नारियल पानी लेते रहें।
  • तली हुई चीज़ों पर निर्भर न रहें। आलू की चिप्स, पकौड़ी और साबूदाना वड़ा लगातार खाने से कैलोरी और तेल बहुत बढ़ जाता है। इनकी जगह फल, मखाना, दही, कुट्टू या सिंघाड़े की रोटी, उबला आलू और मेवे लें।
  • लंबे समय तक भूखे न रहें। कोशिश करें कि बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा खाते रहें, ताकि एक साथ ज़्यादा खाने की नौबत न आए।
  • चाय-कॉफ़ी सीमित रखें। खाली पेट ज़्यादा चाय या कॉफ़ी एसिडिटी बढ़ाती है।

इन लोगों को व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लेनी चाहिए: डायबिटीज़ वाले (खासकर जो इंसुलिन या दवाएँ लेते हैं), गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ, बुज़ुर्ग, और किडनी या दिल की बीमारी के मरीज़। दवाओं का समय या मात्रा खुद से न बदलें।

चक्कर आना, ठंडा पसीना, तेज़ धड़कन या बहुत कमज़ोरी महसूस हो तो व्रत तोड़ देना ही समझदारी है। सेहत से बड़ा कोई नियम नहीं होता।

3. पानी, मिलावट और फ़ूड सेफ़्टी

पर्याप्त पानी पिएँ। तला-भुना और मीठा खाने के बाद शरीर को ज़्यादा पानी चाहिए। दिन भर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएँ। सादा पानी, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और हर्बल चाय अच्छे विकल्प हैं। कोल्ड ड्रिंक और पैकेट वाले जूस से बचें, क्योंकि उनमें चीनी बहुत ज़्यादा होती है।

शराब कम से कम रखें। पार्टियों में शराब से निर्जलीकरण, नींद की गड़बड़ी और पेट की दिक्कतें बढ़ती हैं। अगर पीते भी हैं तो सीमित मात्रा में, खाने के साथ और पानी के साथ पिएँ। गाड़ी चलाने से पहले बिल्कुल न पिएँ।

मिठाई और खोये में मिलावट से सावधान। त्योहारों में माँग बढ़ने पर दूध, खोया, पनीर, घी और मिठाइयों में मिलावट की शिकायतें भी बढ़ जाती हैं। कुछ बातों का ध्यान रखें:

  • भरोसेमंद और लाइसेंस प्राप्त दुकान से ही मिठाई खरीदें, दुकान पर FSSAI लाइसेंस नंबर देखें
  • बहुत सस्ती या ज़रूरत से ज़्यादा चमकदार मिठाई से बचें
  • खुले में रखी या कई दिन पुरानी मिठाई न खरीदें
  • खोये और पनीर की मिठाइयाँ जल्दी खराब होती हैं, इन्हें फ्रिज में रखें और 1 से 2 दिन में खा लें
  • घर पर बनाई गई मिठाई सबसे सुरक्षित विकल्प है, चाहे थोड़ी मात्रा में ही बनाएँ
  • संदेह हो तो FSSAI की शिकायत सुविधा पर रिपोर्ट करें

रसोई की स्वच्छता। बड़ी मात्रा में खाना बनाते समय हाथ धोना, कच्चे और पके खाने को अलग रखना और बचे हुए खाने को जल्दी फ्रिज में रखना न भूलें। पके हुए खाने को 2 घंटे से ज़्यादा बाहर न छोड़ें, खासकर गर्मी वाले दिनों में। फूड पॉइज़निंग के लक्षण (उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार) दिखें तो ओआरएस लें और ज़रूरत हो तो डॉक्टर को दिखाएँ।

बाहर का खाना। ताज़ा और गर्म परोसा गया खाना चुनें। सड़क किनारे बिकने वाले कटे फल, खुले में रखी चटनी और बासी चाट से बचें।

4. प्रदूषण, पटाखे और सांस की सेहत

अक्टूबर से दिसंबर के बीच उत्तर भारत में पहले से ही हवा की गुणवत्ता गिरती है। ऊपर से पटाखों का धुआँ दमा, एलर्जी, सीओपीडी और दिल के मरीज़ों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है।

हवा की गुणवत्ता पर नज़र रखें। अपने शहर का AQI रोज़ देखें। जब AQI खराब या बहुत खराब श्रेणी में हो तो सुबह-शाम की सैर और बाहर के व्यायाम को घर के अंदर ले आएँ।

मास्क का इस्तेमाल। ज़्यादा प्रदूषण वाले दिनों में बाहर निकलते समय N95 या उसी स्तर का मास्क पहनें। साधारण कपड़े का मास्क धुएँ के महीन कणों से ज़्यादा सुरक्षा नहीं देता।

घर की हवा साफ़ रखें।

  • पटाखे चलाने के समय खिड़की-दरवाज़े बंद रखें
  • संभव हो तो एयर प्यूरीफ़ायर का इस्तेमाल करें
  • घर में पौधे रखना अच्छा है, पर वे प्रदूषण का इलाज नहीं हैं
  • दीये और अगरबत्ती का धुआँ भी बंद कमरे में सांस पर असर डालता है, इसलिए हवा आने-जाने का रास्ता रखें

दमा और सांस के मरीज़। अपना इन्हेलर और दवाएँ हमेशा साथ रखें, और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा नियमित लें। पटाखों के धुएँ से दूर रहें और खाँसी, घरघराहट या सांस फूलने पर देर न करें।

हो सके तो हरे और कम शोर वाले विकल्प अपनाएँ। दीयों, रंगोली और रोशनी से दिवाली मनाना सबसे सुरक्षित तरीका है। अगर पटाखे जलाएँ तो अपने इलाके के नियमों का पालन करें, जहाँ पटाखों पर रोक है वहाँ बिल्कुल न जलाएँ।

पटाखों और आग से जुड़ी सुरक्षा। जलने और आँखों में चोट के मामले हर दिवाली पर सामने आते हैं।

  • बच्चों को बिना बड़ों की निगरानी के पटाखे न जलाने दें
  • खुले मैदान में, घर से दूर पटाखे जलाएँ और पास में पानी की बाल्टी रखें
  • ढीले, सिंथेटिक कपड़े न पहनें, सूती कपड़े बेहतर हैं
  • न फटे पटाखे को दोबारा न जलाएँ, उस पर पानी डाल दें
  • मामूली जलन पर तुरंत 10 से 15 मिनट ठंडे बहते पानी में हाथ रखें, बर्फ या मक्खन-टूथपेस्ट न लगाएँ
  • गहरी जलन, आँख की चोट या ज़्यादा हिस्से के जलने पर तुरंत अस्पताल जाएँ

दीयों और मोमबत्तियों को पर्दों, सजावट और बच्चों की पहुँच से दूर रखें, और सोने से पहले सब बुझा दें।

5. नींद, व्यायाम और रोज़ की दिनचर्या

त्योहारों में सबसे पहले नींद और कसरत छूटती है, जबकि यही दोनों चीज़ें सबसे ज़्यादा सुरक्षा देती हैं।

नींद को प्राथमिकता दें। वयस्कों को रोज़ 7 से 8 घंटे की नींद चाहिए। देर रात की पार्टियों के बाद भी सोने और उठने का समय बहुत ज़्यादा न बदलें। रात को भारी खाना और सोने से ठीक पहले मोबाइल स्क्रीन नींद बिगाड़ते हैं। सोने से कम से कम 2 घंटे पहले खाना खा लें।

रोज़ कुछ न कुछ चलें-फिरें। पूरी कसरत संभव न हो तो भी रोज़ 30 मिनट की तेज़ चाल से सैर, घर की सफ़ाई, योग या सूर्य नमस्कार करें। सफ़ाई और सजावट का काम भी अच्छी शारीरिक गतिविधि है। पूरे दिन बैठे न रहें, हर घंटे थोड़ा उठकर चलें।

खाने का समय तय रखें। नाश्ता, दोपहर का खाना और रात का खाना लगभग तय समय पर करें। दावत की वजह से एक वक़्त का खाना छोड़ देने की आदत उलटा नुकसान करती है, क्योंकि फिर अगली बार हम बहुत ज़्यादा खा लेते हैं।

सुबह की शुरुआत अच्छी रखें। गुनगुना पानी, हल्का नाश्ता और थोड़ी धूप दिन की अच्छी शुरुआत है। हवा ज़्यादा खराब हो तो योग और प्राणायाम घर के अंदर करें।

वज़न पर रोज़ पैनिक न करें। त्योहारों के बाद एक-दो दिन में बने वज़न के बदलाव को बहुत गंभीरता से न लें। बस अगले कुछ दिन सामान्य, संतुलित खान-पान और गतिविधि पर लौट आएँ।

6. खास लोगों के लिए खास सावधानियाँ

जिन्हें पहले से कोई बीमारी है, उन्हें त्योहारों में थोड़ी ज़्यादा सतर्कता रखनी चाहिए। नीचे दी गई बातें सामान्य जानकारी हैं; अपनी दवाओं और खान-पान में बदलाव से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।

कौन क्या ध्यान रखें
डायबिटीज़ के मरीज़ मिठाई की मात्रा बहुत कम रखें और उसे भोजन के साथ लें। खाने का समय और दवा या इंसुलिन का समय न बिगाड़ें। शुगर नियमित जाँचें। चक्कर, पसीना या कंपकंपी हो तो हाइपोग्लाइसीमिया का संकेत हो सकता है, तुरंत कुछ मीठा लें और डॉक्टर से संपर्क करें।
हाई बीपी के मरीज़ नमकीन, अचार, पापड़ और पैकेट वाले स्नैक्स कम करें। दवा रोज़ समय पर लें और बीपी की जाँच करते रहें। शराब और ज़्यादा चाय-कॉफ़ी से बचें।
दिल के मरीज़ तला हुआ और ज़्यादा घी वाला खाना कम करें। भारी भोजन एक साथ न करें। सीने में दर्द, भारीपन, बाएँ हाथ या जबड़े में दर्द, या सांस फूलने पर तुरंत इमरजेंसी में जाएँ।
बुज़ुर्ग हल्का, आसानी से पचने वाला खाना दें। पानी पिलाते रहें और दवाओं का समय न चूकने दें। भीड़ और शोर से दूर आराम की जगह दें।
बच्चे मिठाई और चॉकलेट की मात्रा सीमित रखें, साथ में फल और दूध दें। पटाखों के समय बड़ों की निगरानी रखें। छोटे बच्चों को मेवे और सख़्त चीज़ें पूरी न दें, गले में अटकने का ख़तरा रहता है।
गर्भवती महिलाएँ कच्चा या अधपका खाना, बिना पाश्चुरीकृत दूध की चीज़ें और बाहर का खुला खाना न खाएँ। व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
गैस, एसिडिटी या IBS वाले बहुत मसालेदार, तला हुआ और देर रात का खाना कम करें। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार खाएँ।

अपनी दवाएँ पहले से स्टॉक में रखें। त्योहारों की छुट्टियों में दुकानें बंद हो सकती हैं या यात्रा में दिक्कत आ सकती है। पर्याप्त दवाएँ, इन्हेलर, शुगर स्ट्रिप्स और डॉक्टर का नंबर साथ रखें।

7. मानसिक सेहत और तनाव

त्योहार सबके लिए सिर्फ़ ख़ुशी नहीं लाते। सफ़ाई, खरीदारी, मेहमाननवाज़ी, खर्च और रिश्तों की उम्मीदें तनाव बढ़ा सकती हैं, और जिन्होंने किसी अपने को खोया है या जो अकेले हैं, उनके लिए यह समय भारी भी हो सकता है।

  • काम बाँटें। सब कुछ अकेले करने की कोशिश न करें। सफ़ाई, खाना बनाने और सजावट में परिवार के हर सदस्य को शामिल करें।
  • बजट पहले तय करें। खर्च का दबाव तनाव की बड़ी वजह है। उपहारों और खरीदारी की सीमा पहले से तय कर लें।
  • “परफ़ेक्ट” होने का दबाव छोड़ें। घर या दावत का हर काम बिल्कुल सही होना ज़रूरी नहीं है। साथ बिताया समय सजावट से ज़्यादा मायने रखता है।
  • ना कहना सीखें। हर न्योते और हर कार्यक्रम में जाना ज़रूरी नहीं। अपने आराम के लिए भी समय रखें।
  • हर दिन 10 मिनट अपने लिए। गहरी सांसें, प्राणायाम, ध्यान, संगीत या बस शांति से बैठना मन को स्थिर करता है।
  • अकेले लोगों से जुड़ें। पड़ोस के बुज़ुर्गों या अकेले रहने वाले दोस्तों को फ़ोन करें या मिलने बुलाएँ। एक छोटी-सी मुलाक़ात भी बहुत फ़र्क़ डालती है।
  • स्क्रीन और सोशल मीडिया से दूरी। दूसरों की “परफ़ेक्ट” तस्वीरों से अपनी तुलना न करें।

अगर उदासी, बेचैनी या नींद की दिक्कत कई दिनों तक बनी रहे और रोज़मर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना कमज़ोरी नहीं, समझदारी है।

8. त्योहारों का हेल्थ चेकलिस्ट

इसे प्रिंट करके या फ़ोन में सहेजकर रखें और हर दिन टिक करते चलें।

  • दावत में जाने से पहले हल्का नाश्ता या फल खाया
  • आज कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिया
  • मिठाई सीमित मात्रा में खाई और भरोसेमंद जगह से ली
  • तले हुए पकवान एक या दो ही खाए
  • खाने के बाद 10 से 15 मिनट टहला
  • 30 मिनट की सैर, योग या कोई शारीरिक गतिविधि की
  • 7 से 8 घंटे की नींद ली
  • AQI देखा और ज़रूरत पड़ने पर मास्क पहना
  • दवाएँ समय पर लीं (डायबिटीज़, बीपी, दमा आदि)
  • पटाखे या दीये जलाते समय सुरक्षा के नियम माने
  • दिन में कुछ पल अपने लिए और परिवार के साथ बिताए

निष्कर्ष

त्योहारों में सेहत का ध्यान रखने का मतलब ख़ुशियों में कटौती करना नहीं, बल्कि उन्हें लंबे समय तक बनाए रखना है। मात्रा पर नियंत्रण, भरपूर पानी, अच्छी नींद, थोड़ी हलचल, साफ़ हवा और मन की शांति, ये छह बातें याद रखें तो आप बिना पछतावे के पूरे सीज़न का आनंद ले सकते हैं।

और अगर कभी लगे कि तबीयत ठीक नहीं है, तो देर न करें और डॉक्टर से सलाह लें। आप सभी को त्योहारों की हार्दिक शुभकामनाएँ। स्वस्थ रहें, मस्त रहें!

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