बच्चो की मानसिक समस्याए और उनका निवारण 

बच्चो की मानसिक समस्याए और उनका निवारण 

बच्चो की मानसिक समस्याए और उनका निवारण 
आजकल किशोर होते बच्चों के साथ बहुत सारी समस्याएं चलती चली जा रही हैं और उनका एक ही शिकायत होती है कि आप हमें समझते नहीं हैं और किशोर होते बच्चे तो क्या छोटे-छोटे बच्चे भी आजकल मां-बाप को शिकायतें करते हैं कि आप हमें समझ नहीं रहे हो इसका एक सबसे बड़ा कारण है कि हम लोगों ने परिवारों में परिवार के राम नाम पर सिर्फ पति-पत्नी होते हैं कोई दादा-दादी या नाना-नानी जो है नहीं होते जो बच्चों के साथ उनको कुछ कहानियां सुना सके कोई उनके साथ बैठकर उनको मिल सके और जैसे-जैसे वातावरण बदलता चला जा रहा है बच्चों की मानसिकता भी बदलती चली जा रही है

पहले वाले जो हैं वह सिस्टम नहीं रह गए हैं बच्चों के ऊपर ऊपर भी मानसिक दबाव रोज नया बढ़ता चला जा रहा है क्योंकि उनके आगे भी कंपटीशन बढ़ता चला जा रहा है बड़े भी उलझते चले जा रहे हैं जिंदगी का एक हिस्सा बड़े संभालते हैं तो दूसरा पलट जाता है और यही जो आजकल जिंदगी चल रही है वह है कि बच्चों को हमें उनकी दृष्टि से देखना पड़ेगा उनकी अपेक्षाएं समझ नहीं पड़ेगी उनके साथ तालमेल बिठाना पड़ेगा

बच्चों को किन-किन चीजों से हम मां बाप से दिक्कत होती है
1)  बच्चों को हमारा पूछताछ करना जासूस की तरह पसंद नहीं आता
बच्चे जब किसी से अपने फोन पर बात कर रहे होते हैं तो उन्हें हमारा यह पूछना बढ़ा बुरा लगता है कि वह किस से बात कर रहे हैं क्यों बात कर रहे हैं पर माता पिता की तरह हम भी एक ऐसी जगह पर बैठे हैं कि हमारी ड्यूटी बनती है कि हम बच्चे के ऊपर चेक रखें कि क्योंकि हमारी अपनी चिंता है जायज है कि बच्चा कहीं किसी गलत दोस्त से किसी गलत व्यक्ति से ना बात कर रहा हूं कहीं किसी के साथ फस ना जाए कहीं कोई उसकी आदत है ना बिगड़ जाए तो तो हमें भी बहुत अवेयर होना पड़ता है

2)  बच्चों को यह हिदायत पसंद नहीं आती कि हम उन्हें बताएं किस तरह के कपड़े पहनो
पहले बड़े होते बच्चों के साथ यह समस्या आती थी कि जब हम उन्हें कोई कपड़े पहनने के लिए हिदायत देते थे पर आजकल छोटे-छोटे बच्चों को यह दिक्कत आती है कि वह भी यह पसंद नहीं करते कि माता-पिता उन्हें बताएं कि कौन से कपड़े पहने और वह इस बात को लेकर नाराज हो जाते हैं कि माता-पिता हमें इस तरह की हिदायतें क्यों दे रहे हैं

3)  दोस्तों के बारे में ज्यादा पूछताछ करना
बच्चों को यह बिल्कुल पसंद नहीं आता कि हम माता पिता के रूप में बच्चों के दोस्त उनके परिवारों के बारे में कुछ ऐसे ही अन्य आवश्यक प्रश्न उनसे पूछते चले जाएं उनको लगता है कि माता-पिता उनकी जासूसी कर रहे हैं उनके उनको कुरेद कुरेद कर चीजें जाने की कोशिश कर रहे हैं तो यह बच्चों में बहुत बड़ा कंपलेक्स आ जाता है कि माता पिता हमारे ऊपर विश्वास नहीं कर रहे

4)  बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों के साथ करना
माता पिता जो सबसे बड़ी गलती करते हैं कि अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों के साथ करते हैं जिसकी वजह से बच्चों को बहुत परेशानी होती है क्योंकि बच्चे यह मानते हैं कि वह जो हैं वह वह है दूसरे बच्चे अपने घर में क्या है हमें उनके साथ कोई लेना देना नहीं है

5)  बच्चों के जब दोस्त आते हैं हम उनसे ज्यादा घुलने मिलने की कोशिश करते हैं तो भी बच्चों को दिक्कत आती है
बच्चों के जब दोस्त आते हैं हम उनके साथ बैठकर उनकी बातों को जानने की समझने की कोशिश करते हैं तो भी बहुत बड़ी दिक्कत आती है बच्चों को नहीं अच्छा लगता है और कई बार हम बच्चों की कमजोरियों को  बच्चों के सामने उनके दोस्तों के सामने हंसी मजाक में ही जाए सुनाएं सुना देते हैं जो कि बच्चों को अच्छा नहीं लगता

6)  बच्चों की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर करना
यह आजकल एक बहुत बड़ा इशू बना हुआ है मां बाप अपने बच्चों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं और बच्चे उन तस्वीरों को किसी को दिखाना ही नहीं चाहते इस वजह से भी वह माता-पिता से कटे कटे रहते हैं और अपनी तस्वीरें माता-पिता को देना नहीं चाहते

इन सब समस्याओं से निजात पाने के लिए आपको कुछ मेहनत करनी पड़ेगी
1) बच्चों से तालमेल बिठाए 
जब भी बच्चे किसी से बात कर रहे हो तो बीच में बार-बार जाकर ना पूछे किस से बात कर रहे हैं जब बात पूरी हो जाए उसके बाद उनसे पूछिए कि आप किस से बात कर रहे थे और फोन के इस्तेमाल की भी सीमा आप बच्चे पर बना दीजिए

2)  बच्चे की पसंद को समझिए
आजकल वह वातावरण नहीं रह गया कि बच्चे माता पिता के हिसाब से कपड़े पहने पर आप उन्हें बाजार उनके साथ लेकर जाएं और उनके हिसाब से कपड़े ले कर दें जब आप साथ होंगे तो वह भी कपड़े जो है ठीक से चुनेंगे और बचपन में भी कोई ऐसे कपड़े ना पहनाए जो बड़े होकर गलत लगे

3)  तुलना करनी बंद कीजिए
बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों के साथ बंद कीजिए अपने पुराने किस्से कहानियां सुनाकर आज को और अपने कल की मत तुलना कीजिए क्योंकि बच्चे इसमें दिलचस्पी नहीं रखते हैं आपको धैर्य रखना पड़ेगा और वातावरण के हिसाब से खुद भी बदलना पड़ेगा

4)  बच्चों के दोस्तों के साथ ज्यादा ना बैठे
बच्चों के दोस्तों के साथ ज्यादा खुले मिले नहीं ज्यादा बैठे नहीं उनके साथ ज्यादा बात नहीं करें क्योंकि माता पिता के रूप में अगर कोई बच्चा गलत हमारे घर में आ रहा है तो बच्चे के हाव भाव देखकर ही हमें पता लग जाता है और अगर उस बच्चे के जाने के बाद हमारे बच्चे के आचरण में कोई परिवर्तन आता है तो वह भी हमें समझ में आ जाता है तो थोड़ी सी समझदारी से काम लीजिए

यह मत सोचिए कि माता पिता के रूप में आपको ही बच्चों की परवरिश करने में समस्या है बच्चों को भी आपसे समस्या आपके व्यवहार की वजह से आ रही है और आजकल के जो बच्चे हैं वह इन समस्याओं से बहुत जूझ रहे हैं तो एक अच्छे माता-पिता बनिए बच्चों की अच्छी परवरिश कीजिए और उन्हें अपने नजदीक रखिए और कोशिश करिए कि अगर आप संयुक्त परिवार में रह सके क्योंकि संयुक्त परिवार में जवाब रहते हैं तो बच्चों के साथ होने वाली दिक्कतें कम होती हैं उनके मन को आसानी से समझा जा सकता है और बच्चों के पास भी जगह होती है कि वह कहीं और बात कर सके

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