बच्चों को अनुशासन सिखाने के 5 मंत्र

बच्चों को अनुशासन सिखाने के 5 मंत्र

बच्चों को अनुशासन सिखाने के 5 मंत्र

कई बार बच्चे इस हद तक बढ़ जाते हैं कि मां-बाप अगर सही भी कह रहे हैं तो वह भी वह मानने को तैयार नहीं होते और वह हमेशा उसके उलट चलते हैं कि आप जो भी कुछ करने को कहोगे बस मानना नहीं है उसको करना नहीं है हर काम के लिए समय मांगते जा रहे हैं और उस समय पर काम नहीं कर रहा कुछ समय देखने के बाद उन पर कार्रवाई करनी बनती है उन्हें अनुशासित करना पड़ेगा पर उन्हें सही तरीके से कैसे अनुशासित किया जाए उसके कुछ तरीके आपको बता रहे हैं
बच्चों को अनुशासन सिखाने के 5 मंत्र
बच्चों को अनुशासन सिखाने के 5 मंत्र
1)  अनुशासन को कभी भी सजा के साथ ना मिलाएं
कई बार मां-बाप जब अनुशासन सिखा रहे होते हैं तो वह दंड को भी इसी का हिस्सा मान लेते हैं जबकि दंड देना और अनुशासन सिखाना दोनों ही चीजों में बहुत फर्क है मैं यहां आपको एक उदाहरण के रूप में आपको बताती हूं एक मां अपने बच्चे से मोबाइल छुड़वाना चाहती थी तो उसने उसका मोबाइल लेकर अलमारी में बंद कर दिया और दूसरी बार जब बच्चा नहीं माना तो मोबाइल तोड़ दिया यह अनुशासन नहीं है यह दंड है अगर आप भटके  हुए बच्चे को अनुशासन सिखाना चाहते हैं तो क्योंकि बच्चे को आदत पड़ चुकी है मोबाइल की तो आप रोज 15:15 मिनट करके उसका टाइम बढ़ाइए जितना टाइम रोज का लेता है उसमें से रोज का 15 मिनट कट करना शुरू कीजिए और साथ में और 15 मिनट में खुद भी मोबाइल मत प्रयोग कीजिए धीरे-धीरे करके बच्चे की आदत भी छूटेगी और वह अनुशासन में भी आएगा कभी भी दंड देना हमेशा समाधान नहीं होता

2)  सिर्फ अनुशासन ही ना सिखाएं प्रशंसा भी करें
जब आप अपने बच्चे को अनुशासन में ला रहे होते हैं किसी काम के लिए उसे बातें कर रहे होते हैं तो अगर वह अपने उस अनुशासन में सफल होता है चाहे जो अनुशासन आप सौ परसेंट सिखाना चाह रहे हैं उसका वह 50 पर्सेंट भी सफल होता है तो उसको शाबाशी दीजिए उसे प्रशंसा कीजिए ताकि वह अपने आप को और अनुशासित कर सके बजाय यह कहने के कि तूने तो पूरी बात मानी नहीं तूने तो आधी अधूरी बात मानी है तो कुछ कर ही नहीं सकता क्योंकि प्रशंसा किसी की बिकी हुई हमेशा उसको उत्साहित रखेगी

3)  अगर अपने बच्चों को अनुशासित करना चाहते हैं तो धमकी भरे शब्दों का उपयोग ना करें
कई बार माता पिता क्या करते हैं जब बच्चों को अनुशासित करना होता है तो उसके साथ ही चेतावनी भी दे डालते हैं कि अगर यह काम तुमने नहीं किया तो तुम्हारी यह सब चीजें बंद कर दी जाएंगी या तुम्हें कमरे में बंद कर दिया जाएगा तो मैं बाथरूम में बंद कर दिया जाएगा तो यह सब उचित नहीं है तू कि अगर हम चाहते हैं हमारा बच्चा अनुशासन में रहे तो कुछ चीजों में हमें अपने आप में भी बदलाव लाना पड़ेगा और अगर हम अपने बच्चे से कुछ एक्सपेक्ट करते हैं तो खुद भी उस दिशा में काम करना पड़ेगा एक बच्चे को यह पता होना चाहिए कि माता-पिता अनुशासन के रूप में उससे क्या चाह रहे हैं क्या उम्मीद रख रहे हैं

4)  बच्चों के साथ माता-पिता जैसा व्यवहार करो दोस्ताना व्यवहार नहीं
जब भी बच्चों को अनुशासन से खाना हो तो बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार काम नहीं आएगा क्योंकि अनुशासित करने के लिए कभी-कभी आपको कठोर भी होना पड़ेगा दोस्त बनकर हम उनको अनुशासन नहीं सिखा पाएंगे क्योंकि जब हम अपने बच्चे को अनुशासन सिखा रहे होते हैं तो हम उसके लिए अध्यापक का काम भी करते हैं उसके लिए अभिभावक का काम भी करते हैं उसके मार्गदर्शक के रूप में भी काम करते हैं और एक दोस्त यह जिम्मेदारियां कभी नहीं निभा सकता इसलिए जब अनुशासन से खाना हो तो दोस्ताना व्यवहार को एक तरफ रख दें

5)  अनुशासन सिखाएं पर दूसरों के सामने अपने बच्चों की कमजोरियां ना उजागर करें
कई बार माता-पिता जब बच्चे को अनुशासित कर रहे होते हैं तो उन्हें यह सबसे आसान तरीका लगता है कि बच्चा अगर कुछ गलत कर रहा है तो उसके दोस्तों के सामने अगर हम इस की कमजोरी को बताएंगे तो शायद इसे शर्म आएगी और यह अपने आप को ठीक कर लेगा यह कभी भी एक सही तरीका नहीं होता बच्चा हमारा है हमने उसे अनुशासित करना है हो सकता है हमें ही गलती हो हम ही उसे घर का वातावरण वैसा ना दे पा रहे हो कि वह अनुशासित हो सके या उसके साथ जो उठने बैठने वाले बच्चे हैं उनके घरों का माहौल बहुत अच्छा हो इसलिए वह अनुशासित हो तो अपने बच्चों को अगर आप अनुशासन सिखा रहे हैं तो दोस्तों के सामने कभी भी उसकी कमजोरियों को सामने ना लाएं इससे बच्चे में हीन भावना भी आएगी और वह आपकी बात भी नहीं मानेगा

यह 5 टिप्स थे जो मैंने आपको दिए कि एक बच्चे को अनुशासित करने में सिर्फ बच्चा ही जिम्मेवार नहीं होता परिवार माता पिता उसके भाई बहन उसका वातावरण बहुत सारी चीजें जिम्मेवार होती है तब जाकर कहीं एक बच्चा अनुशासित बनता है यकीन मानिए एक बच्चा कच्ची मिट्टी की तरह होता है उसे हम जैसा ढालना चाहेंगे वैसा ढल जाएंगे पर उसके लिए कुछ तरीके हमें अपनाने पड़ेंगे हमेशा दंडात्मक तरीका अपनाकर हम अपने बच्चे को अनुशासित नहीं कर सकते अगर बच्चों में अनुशासन लाना है तो सबसे पहले अपने अंदर अपने परिवार के अंदर अपने से बड़ों और छोटों के साथ अनुशासन लाना पड़ेगा
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