पेरेंटिंग में होंगे बडे़ बदलाव स्कूल कॉलेज खुलने के बाद

पेरेंटिंग में होंगे बडे़ बदलाव स्कूल कॉलेज खुलने के बाद

सरकार ने अनलॉक एक की अनाउंसमेंट कर दी है तो इस अनाउंसमेंट के साथ सिर्फ स्कूल कॉलेज और शिक्षण संस्थान ही खुलने रह गए  हैं जिनमें अभी टेंटेटिव रूप से कहा जा रहा है कि वह 1 जुलाई से खुलेंगे और अब माता पिता को अपने बच्चों के पालन पोषण और परवरिश पर भी ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा

पहला जो बदलाव आएगा क्योंकि अब स्टडी मॉडल जो है आने वाले समय में बदल जाएगा मानव संस्थान विकास मंत्रालय इस पर लगातार कम काम कर रहा है क्योंकि जो कोरोना महामारी पूरे विश्व में छाई है उसको देखते हुए कहीं ना कहीं जो है स्कूलों की बजाय होम लर्निंग के ऊपर ज्यादा महत्व दिया जाएगा ज्यादा काम किया जाएगा जैसे हम भारतीय छोटे स्कूलों में बच्चे जो हैं कम से कम 1000 -1700 घंटे से ऊपर का वक्त जो है स्कूल में देते थे और 200-250 दिन थे वह हमारे बच्चे स्कूल में बिताते थे तो अब सरकार इनको जो है आधे पर ला सकती है कि जो स्कूल के खुलने के दिन है वह 100 -150 के बीच में रहे और जो स्कूल के घंटे हैं वह 500 से 600 के बीच में रहे और जो घंटे स्कूल में जाने से बचेंगे उनके लिए कहीं ना कहीं काउंसलर की अपॉइंटमेंट या माता-पिता को खुद वक्त देना पड़ेगा ताकि बच्चों की जो इमोशनल है उसका ख्याल रखा जा सके क्योंकि आने वाले समय में सरकार प्रावधान कर सकती है कि आधे बच्चे क्लास में 1 दिन आएंगे आधे बच्चे क्लास में दूसरे दिन आएंगे तो हो सकता है हमारे बच्चों के जो अच्छे मित्र हैं वह कहीं क्लास से बचने के चक्कर में छूट जाएंगे तो हमें एस माता-पिता उनकी भावनात्मक सेहत के ऊपर भी काम करना पड़ेगा उनके जो मित्र उनसे रोज़ नहीं मिल पाएंगे उसका भी कोई ना कोई अरेंजमेंट उनकी जिंदगी में करना पड़ेगा ताकि वह अपने आप को अलग थलग ना समझे

पेरेंटिंग में होंगे बडे़ बदलाव स्कूल कॉलेज खुलने के बाद

दूसरा और सबसे बड़ा बदलाव क्या होगा कि जैसे स्कूल शुरु होंगे और घर में जिनके दो बच्चे हैं या तीन बच्चे हैं तो माता-पिता को भी बच्चों के साथ स्क्रीन के ऊपर जो वक्त है वह दो या तीन गुणा करना पड़ेगा घर में कंप्यूटर या मोबाइल या आईपैड उनकी संख्या बढ़ानी पड़ेगी इंटरनेट की जरूरतों को हमें और बढ़ाना पड़ेगा ज्यादा डाटा खरीदना पड़ेगा और अगर दोनों माता पिता आफिस मे काम करते हैं तो बच्चों को कैसे मदद करें क्योंकि दिन में बच्चे घर में अकेले होंगे उन्होंने ऑनलाइन क्लासेज भी लेनी है उसके ऊपर चेक कैसे रखा जाए तो अब हमें कुछ ऐसे अध्यापकों की जरूरत भी रहेगी कि जो हमारे बच्चों पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग कर सके

हम अगर ऑफिस में बैठे हैं तो वह स्कूल जैसे ही क्लास ऑनलाइन करें तो वह टीचर हमें माता पिता को ही एंड शेयर करें कि मेरे दो बच्चे हैं वह स्कूल का टाइम है वह पूरा करवा रहा है और जिस तरह से हम घर में बच्चों के खाना पकाने के लिए आया रखते हैं वैसे ही यह नए जो टीचर हैं वह ऑनलाइन हमारे बच्चे क्लासेस ले सकें उसमें भी मदद करेंगे सिर्फ इसके लिए उनका कंप्यूटर का थोड़ा-बहुत ज्ञान होना अति जरूरी होगा ताकि वह देख पाए कि बच्चे जो ऑनलाइन पढ़ रहे हो स्कूल की क्लास ही पढ़ रहे हैं

सबसे बड़ा जो बदलाव आएगा कि आज विश्व भर में ही ढूंढा जा रहा है कि बच्चों को ऑनलाइन एग्जाम दिलाने के लिए कौन से ऐसे सिस्टम सेट किए जाएं कि बच्चे नकल भी ना कर पाए और वो ऑनलाइन सिस्टम के थ्रू परीक्षाएं भी दे सकें जैसे हमारे पहले जी आरईजी मैथ और इंग्लिश लैंग्वेज कैसे टेस्ट टाइम ऑनलाइन पहले से ही चल रहे हैं और सबसे बड़ी बात ऑनलाइन परीक्षा में क्या है कि जो लोग पहले परचियो से निकलकर के पास होते थे अब वह काम नहीं हो पाएगा क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में जब निगरानी होती है तो ऑनलाइन नक़ल करना जो है क्लास में जो टीचर है उसको से तो आप एक बार फिर से चोरी कर सकते हैं परंतु ऑनलाइन में आप कुछ भी नहीं कर पाएंगे क्योंकि हर एक बच्चे के ऊपर एक वेबकैम लगा होता है और एक टीचर और बच्चे के ऊपर अलग से ऐसा ही होता है और उसके ऊपर नजर रहती है तो और सबसे बड़ी बात ऐसे हम सोच लेते हैं हम अपनी जगह जो कुछ गलत काम करते हैं जब पेपर होता तो अपनी जगह किसी और को भेज देते हैं और पकड़े भी जाते हैं तो ऑनलाइन में यह सब चीजें जो है बड़ी मुश्किल है और हो हीं नहीं पाएंगी हम सोचे हम घर में बैठकर पेपर दे रहे हैं कोई और गूगल में साथ में खोलकर अपने क्वेश्चन के आंसर देंगे तो वह नहीं हो पाएगा तो अब क्या है जो हमारे मोरल वैल्यू है वह बहुत बड़ी जिम्मेवारी जाएगी की बच्चे नकल करने से हटे अपना सब कुछ अच्छे से पढ़ें क्योंकि तभी वह परीक्षा में सफल हो पाएंगे और हमें कोरोना के साथ-साथ जीने के हमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जो हमारी और हमारे बच्चों की निगरानी होगी उसको भी सीखना होगा उसको भी देखना होगा और इन पैदा हुई परिस्थितियों में पेरेंट्स को भी बच्चों के साथ बहुत डिसिप्लिन होना पड़ेगा

24 घंटे जो दिन के हैं उनको बैठना पड़ेगा कि कौन से हमने अपने ऑफिस के काम को देने हैं कौन से घंटे हमने घर के काम को देने हैं कौन से घंटे हमने बच्चों की पढ़ाई के लिए देने हैं और कौन से ऐसे घंटे रखने हैं जिसमें हम अपने बाकी के काम लोगों से मिलना जुलना बाजार के काम में और काम करने हैं तो साथ साथ हमें बच्चों को भी अब मोरल शिक्षा के जो पाठ हैं खुद भी पढ़ने होंगे और बच्चों को भी पढ़ाने होंगे उनके अंदर इमानदारी भी पैदा करनी होगी और डिसिप्लिन भी लाना पड़ेगा तो आगे आने वाला वक्त माता-पिता के लिए भी कोई आसान नहीं रह गया उन्हें अपने आप में बड़े महत्वपूर्ण बदलाव लाने पड़ेंगे तभी वह अपने बच्चों में भी वह बदलाव ला पाएंगे और उनके बच्चे अच्छी तरह से परफॉर्म कर पाएंगे इस समय जो तनाव है सबकी जिंदगी में है पर उस तनाव को जो अच्छे से पार कर जाएगा विजेता वही रहेगा उसमें चाहे माता-पिता हैं और चाहे बच्चे हैं

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