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Motivational Story मेरी कहानी जिद्द से जीत तक की सफलता

Motivational Story मेरी कहानी जिद्द से जीत तक की सफलता
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Motivational Story मेरी कहानी जिद्द से जीत तक की सफलता

 

जिंदगी में हर व्यक्ति जिंदगी की ऊंचाइयों को छूना चाहता है सफल होना चाहता है पर जो व्यक्ति सफल होना चाहता है उसे कभी-कभी असफलता का सामना करना पड़ता है क्योंकि सफल और असफल दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जिस व्यक्ति ने सफलता का स्वाद नहीं चखा उसे सफलता का स्वाद नहीं आएगा

 

जो व्यक्ति सफल होता है निश्चय ही वह अन्य व्यक्तियों से अलग होता है क्योंकि जो व्यक्ति जीतता है उसमें अवश्य ही कुछ खास बात होती है उसकी मेहनत में कुछ खास बात होती है भीड़ से कुछ अलग हटकर होता है क्योंकि तभी तो उसने जीत हासिल की  सफलता पाना चाहते हो या जीतना चाहते हो उसके  मन में बहुत बड़ी इच्छा होनी जरूरी है क्योंकि अगर मन में इच्छा है जुनून है लालसा है तभी आप सफलता पा सकते हो उसके लिए दृढ़ संकल्प होना बड़ा जरूरी है मेहनत करने का जज्बा बड़ा जरूरी है
ज़िद से जीत अभी समय है जब हम अपने सारी शक्तियों और योग्यताओं को एक तरफ लगा दें और अपनी जिद को सफलता पूरी करने में लगा दे
यहां पर जिद करने का मतलब वह नहीं कि बच्चों वाली से तो करनी है बल्कि सफलता की सीढ़ियां चढ़ने का जो संकल्प है उसको करना जिसका अर्थ है अपनी इच्छाशक्ति को इकट्ठा करना अपनी योग्यता शक्ति और काबिलियत से भी बढ़कर उसके लिए काम करना और यदि हमारा जनून उस काम के लिए पक्का है तो सफलता अवश्य मिलेगी
उसके लिए मन में पक्का निश्चय करना पड़ेगा विचार बनाना पड़ेगा दृढ़ प्रतिज्ञा करनी पड़ेगी फिर रास्ते भी स्वयं निकलेंगे कहा जाता है जहां चाहा वहां रहा अगर मन में ठान लिया तो कोई भी रास्ता कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं है किसी की हिम्मत नहीं कि कोई आपके रास्ते में रुकावट बनकर आपको मंजिल तक पहुंचने से रोक पाए मंजिल जितनी मर्जी दूर हो पर अगर आप का निश्चय उससे भी बड़ा होगा तो आप मंजिल अवश्य पा लेंगे सफलता अवश्य पा लेंगे
यह सिद्धांत अगर जिंदगी में सफलता पानी है तो याद रखना होगा कि अगर सफलता पानी है तो परेशान तो रहना पड़ेगा और जब आप परेशान होंगे तो उस पर काम भी करेंगे और सफलता भी पा लेंगे
सफलता या जीत का अर्थ है अपने आसपास के लोगों से या अपने व्यापार से जुड़े लोगों से आगे बढ़ना या पढ़ाई में किसी को पीछे छोड़कर अपना रैंक ऊपर लाना कोई भी देखना नहीं चाहता और जब हमारे से कोई ऊपर जाता है तो हमें बड़ा बुरा भी लगता है
अगर आपने जिंदगी है तो उस सिद्ध को पूरा करने के लिए तैयार भी होना पड़ेगा सिर्फ जिद करने से ही जीत नहीं मिलेगी परिस्थितियों से भी लड़ना पड़ेगा हो सकता है घरवालों से भी लड़ना पड़ेगा अपनी काबिलियत और ज्ञान में भी बढ़ोतरी करनी पड़ेगी अपनी कमजोरियों को भी आना पड़ेगा उनके ऊपर काम भी करना पड़ेगा जीत या सफलता हर व्यक्ति पाना चाहता है पर जीत वही हासिल करेगा जो अपने निश्चय में पक्का होगा जुनूनी होगा आत्मविश्वास से भरा होगा
संभव और असंभव के  बीच का अंतर सिर्फ व्यक्ति की इच्छा शक्ति में होता है, किसी चीज को पाना है तो वादा खुद से करना होगा और उस वादे की पूर्ति के लिए अपनी जान लगा देनी होगी जब आप में अपने लक्ष्य को पाने का जज्बा होगा अनुशासन होगा तो ईश्वर भी आपका साथ देंगे

Motivational Story मेरी कहानी जिद्द से जीत तक की सफलता

इच्छाशक्ति की एक सच्ची कहानी जो मेरी जिंदगी से जुड़ी है मैं आज आपको बता रही हूं
मेरा परिवार बहुत बड़ा था परिवार में पांच बहने एक भाई माता-पिता दादी यह सब लोग थे और मुझसे बड़े चार लोग थे जिन्होंने एक साधारण शिक्षा ली पर मेरे मन में शुरू से एक इच्छा थी कि मैं अपनी जिंदगी में कुछ बनना चाहती हूं तो मन में छोटे होते से एक विचार था कि डॉक्टर बनना है , डॉक्टर का सपना बड़ा मन में था पर घर की परिस्थितियां ऐसी थी कि मैं डॉक्टर नहीं बन पाई तो फिर मैंने सोचा कि नहीं जिंदगी में बनना तो कुछ है कुछ ना कुछ तो हासिल करना है तो मैंने सिर्फ यह का सपना था ना जिसके लिए मेरे पिताजी ने एक बार तो सीधे-सीधे मना कर दिया कि नहीं ग्रेजुएशन हो गई अब इसकी शादी करनी है तो मैं जिद पर अड़ गई कि नहीं मुझे तो कोई ना कोई प्रोफेशनल क्वालीफिकेशन लेनी है मैं आपके जिद नहीं मानूंगी मैं तब तक शादी नहीं करूंगी जब तक मेरे हाथ में कोई डिग्री नहीं आ जाएगी बहुत दिनों तक घर में लड़ाई झगड़ा चलता रहा
अंततः उन्हें मेरी जिद के आगे झुकना पड़ा क्योंकि वह बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे माता-पिता मेरे दोनों अनपढ़ थे मेरे भाई ने मुझे पूरा सपोर्ट किया मेरी जिद में उसने मेरा साथ दिया और मैंने अपनी सीए की पढ़ाई शुरू करें हालांकि उस समय सीए करना कोई आसान नहीं था क्योंकि ट्यूशन की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी बहुत छोटे से शहर में में रहती थी मैं यह आपसे बात कर रही हूं 1993 की कोई भी सीए से रिलेटेड किताबें लेनी होती थी तो सिर्फ दिल्ली से मिलती थी घर की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी की बहुत सारी किताबें या कोई ट्यूशन की हेल्प में कहीं से ले पाती मुझे अपना खर्चा ट्यूशन चला कर पूरा करना पड़ता था पर मन के अंदर जो जुनून ठान लिया था कि सीए बनना है तो बनना है फिर चाहे उसके लिए मुझे कितनी ही मेहनत करनी पड़े मुझे 16:16 घंटे पढ़ना पड़ता था
3 साल की ट्रेनिंग भी पूरी करनी पड़ी और फिर मेरे सीए इंटर के दो ग्रुप इकट्ठे के लिए हुए उसके बाद मैंने फाइनल के दोनों ग्रुप इकट्ठे दिए जिसमें मेरे एक ग्रुप एक पेपर क्लियर हुआ और तीन के पर मेरे अगली बार में हो गए तो कहने का भाव यहां पर यह है कि अगर आप अपने मन में ठान लें तो परिस्थितियां भी आपके आड़े नहीं आ सकती कोई ना कोई मदद करने वाला भी आपको मिल जाएगा बस आप अपनी मंजिल को कैसे पहना चाहते हैं यह आपके अपने ऊपर है उसके बाद मन में कहीं न कहीं दबी छुपी इच्छा की नाम के आगे डॉक्टर जरूर लगे तो शादी के बाद में सोशल सर्विस के फील्ड में आई तो मैंने पीएचडी की पढ़ाई शुरू की गई पर किसी कारणवश मुझे वह पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी क्योंकि मेरे पति की मृत्यु हो गई थी मैं पीएचडी का फाइनल वायवा देने नहीं जा पाई  पर अभी भी मन में वह अच्छा अधूरी थी तभी  मेरे सामाजिक कार्यों की वजह से मुझे यूनिवर्सिटी ऑफ एशिया वालों ने मुझे मानद पीएचडी की उपाधि दी और आज मेरे नाम के आगे डॉक्टर लगा है तो यह थी मेरी जिद से जीत की सफलता
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