ज्ञान की बातें जिंदगी में कैसे अमल करे

ज्ञान की बातें जिंदगी में कैसे अमल करे

 

ज्ञान की बातें सिर्फ़ सुननी ही नहीं अमल भी करे आज एक कहानी के माध्यम से मैं आपको समझाना चाहूंगी कि ज्ञान की बातें सिर्फ़ सुनने के लिए नहीं अमल करने के लिए भी होती है

 

एक राजा के महल में एक बहुत सुंदर बाग था और वहाँ कुछ पक्षी रोज फल खाने आते थे तो एक दिन माली ने राजा को बताया की पक्षी रोज़ बाग को फल खाकर ख़राब करते हैं एक दिन रहा जब वह आदमी माली के कहने पे चला गया और उसने उसके हाथ में एक चिड़िया आ गई राजा ने उस चिड़िया को पकड़ लिया राजा जब चिड़िया को मारने लगा तो चिड़िया ने बोला राजन् मुझे मत मारो में तुम्हें ज्ञान की चार बातें बताऊँगी

 

 

राजा ने कहा ठीक है चिड़िया ने सबसे पहला जो ज्ञान दिया हाथ आये शत्रु को कभी मत छोड़ो दूसरा असंभव बात पर भूल कर भी विश्वास मत करो तीसरा बीती बातों पर कभी पश्चाताप मत करो और चौथी बात उसने बोली मुझे थोड़ा सा ढीला कर तो मेरा दम घुट रहा है, साँस लेकर ही बता पाएंगे जैसे ही राजा ने चिड़िया को पकड़ से ढीला किया चिड़िया उड़ी

 

 

और एक डाल पर बैठ गई और बोली राजन तुमने मेरे कहने पर मुझ पर पकड़ ढीली कर दी परन्तु मेरे पेट में तो दो हीरे हैं ये सुनकर राजा प्रायश्चित करने लगा और राजा की इस हालत को देखकर चिड़िया बोली राजा ज्ञान सुनने और पढ़ने से कोई लाभ नहीं होता है उस पर अमल करना होता है
आपने मेरी बात नहीं मानी मैंने सबसे पहले बोला था का कि हाथ आये शत्रु को मत छोड़ो आप ने फिर भी उसे पकड़कर मेरे कहने पर मुझे ढीला छोड़ दिया

 

 

और फिर इस बात पर विश्वास किया कि मेरे पीठ में दो हीरे है आपने उस पर भी भरोसा कर लिया और पश्चाताप करने लगते हैं इसलिए जब तक आप प्रवचन सुनने जाते हैं उन प्रवचनों का आपकी ज़िंदगी में कोई मोल नहीं है अगर आप उन्हें सुन कर अपनी ज़िंदगी में उतारते नहीं है

 

 

इसलिए जब भी किसी कथा प्रवचन में जाए तो वहाँ से जाकर जो आपने सुना और सुन कर जो ग्रहण किया अगर वो प्रैक्टीकल रूप से आपने अपनी ज़िंदगी में शामिल नहीं किया तब तक उस प्रवचन में उस कथा में उस समागम में जाने का कोई फ़ायदा नहीं

 

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